शनि ग्रह के बिषय में कुछ महत्वपूर्ण जानकारी हिन्दी में............

 *✔✔शनि ग्रह 🌐🌐*

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🔴शनि ग्रह सूर्य से दूरी अनुसार 6वें स्थान पर है और बृहस्पति के बाद यह सबसे बड़ा ग्रह है।


♦शनि ग्रह की रूपरेखा –


✅सुर्य से दूरी : 142 करोड़ 66 लाख 66 हज़ार 422 किलोमीटर (9.58 AU)

✅एक साल : पृथ्वी के 29.45 साल या 10,755.70 दिन के बराबर

✅ एक दिन : 10 घंटे 34 मिनट

✅ द्रव्यमान (Mass) : 5,68,319 खरब अरब किलोग्राम (पृथ्वी से 95.16 गुणा ज्यादा

✅भू-मध्य रेखीय व्यास : 1,20,536 किलोमीटर

✅ध्रुवीय व्यास : 1,02,728 किलोमीटर

✅ भू-मध्य रेखिए घेरा : 3,62,882 किलोमीटर

✅ सतह का औसतन तापमान : -139°C

शनि ग्रह के बारे में रोचक तथ्य – About Saturn Planet in Hindi


🔴शनि ग्रह को पृथ्वी से नंगी आँखो से देखा जा सकता है। यह पृथ्वी पर से सुर्य, चाँद, शुक्र और बृहस्पति ग्रह के बाद सबसे ज्यादा चमकीला दिखता है।


🔴 शनि ग्रह सबसे ज्यादा चपटा(flat) ग्रह है। इसका ध्रुवीय व्यास इसके भू-मध्य रेखिए व्यास का 90% है। इसका कारण है इसका कम घनत्व और अपनी धुरी के समक्ष तेजी से घूमना।


🔴 शनि ग्रह मात्र 10 घंटे और 34 मिनट में अपनी धुरी के समक्ष एक चक्कर पूरा कर लेता है। इस तरह से इसका एक दिन बृहस्पति(9 घंटे 55 मिनट) के बाद बाकी सभी ग्रहों से छोटा होता है।


🔴 शनि ग्रह का घनत्व बाकी सभी ग्रहों से कम है। द्रव पानी के मुकाबले इसका घनत्व मात्र 0.7 है। शनि ग्रह का व्यास पृथ्वी के व्यास से 9 गुणा ज्यादा है जबकि घनत्व 8 गुना कम है।


🔴 बृहस्पति की तरह ही शनि मुख्य रूप से हाईड्रोजन और हीलीयम से बना हुआ है। इसके सिवा जल, मिथेन, अमोनिया और चट्टानों के कुछ अंश है। 


🔴बृहस्पति की तरह ही शनि का केंद्रक चट्टानी है और आसपास द्रवित धात्त्तिवक हाईड्रोजन की परत है। इसकी सतह भी गैसीय है।


🔴 शनि ग्रह को इसके बड़े-बड़े छल्लों(वलयों) के कारण बाकी ग्रहों से अनूठा माना जाता है। यह छल्ले है तो बृहस्पति, यूरेनस और नेपच्चुन पर भी पर शनि के छल्ले संख्या और आकार में ज्यादा है |


🔴 शनि के वलय छोटे-छोटे कणों से बने हुए हैं। यह कण मुख्य रूप से पानी की बर्फ के बने हैं पर इनमें चट्टानों के कण भी शामिल हैं। इन कणों का आकार कुछ सेंटीमीटर से लेकर कुछ मीटर तक का है। यह कण अपने छल्ले में रहकर स्वतंत्र रूप से शनि की परिक्रमा करते हैं।


🔴 शनि के छल्लों का व्यास भले ही 2 लाख 82 हज़ार किलोमीटर से ज्यादा है परंतु इनकी मोटाई एक किलोमीटर से भी कम है। इन छल्लों की विशालता की तुलना में पदार्थ की मात्रा बहुत कम है। यदि सभी छल्लों के पदार्थो को एक आकाशी पिंड बनाने में उपयोग किया जाए तो उस पिंड का आकार 100 किलोमीटर से कम होगा।



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