उल्काएं क्या है? जानिए उल्काओ के बिषय में कुछ महत्वपूर्ण जानकारी हिन्दी में............
कई बार रात के समय आकाश कि ओर देखने पर लगता है कि कोई तारा टूटकर एक चमकीली रेखा बनाता हुआ वायुमंडल में गायब हो गया l इसे आम भासा में तारा टूटना कहते हैं l टूटकर गिरने वाले ये आकाशीय पिण्ड वास्तव में तारे नहीं होते, बल्कि उल्काएं (Meteorites) होती हैं l
उल्काएं वास्तव में छोटे-बड़े आकाशीय पिण्ड हैं l जो सौरमंडल (Solar System) के सदस्य हैं और सूर्य कि परिक्रमा करते हैं l जब कभी कोई पिण्ड घूमते-घूमते पृथ्वी के पास आ जाता है, तो पृथ्वी कि आकर्षण शक्ति के कारण यह पिण्ड पृथ्वी कि और खिच जाता है, खिंचाव से पिण्ड का वेग बहुत अधिक बढ़ जाता है और वायुमंडल के घिषॅण के कारण यह इतना गर्म हो जाता है कि इसमें से गैसें निकलने लगती हैं l ये गैसें जल उठती है और वायुमंडल प्रकाशित हो उठता है l हवा में रगड़ की आवाज़ दूर-दूर तक सुनाई देती है l गर्मी और घिषॅण के कारण इनके बहुत छोटे-छोटे टुकड़े हो जाते हैl जो वायुमंडल में ही बिखर जाते हैं लेकिन कुछ पिण्ड इतने बड़े होते हैं कि वे पूरी तरह वायुमंडल में नस्ट नहीं हो पाते, इसलिए उनके कुछ हिस्से पृथ्वी पर गिर जाते हैं l
हमें उल्काएं वायुमंडल में 112 कि. मी. दुरी पर दिखाई देने लगती हैं l
अधिकांश उल्काएं वायुमंडल से पृथ्वी पर 80 कि. मी. दूर कि ऊंचाई तक आते-आते नष्ट हो जाती हैं l इसका वेग प्राय: 160 कि. मी. से लेकर 200 कि. मी. प्रति सैकिण्ड तक होता है l
उल्कापात दिन और रात दोनों में ही होता रहता है, लेकिन दिन के प्रकाश में यह हमें दिखाई नहीं देता l
*उल्काएं तीन प्रकार कि होती हैं l*
🌠 पहली तरह कि उल्का को टूटता तारा (Shooting Star) कहते हैं यह कम प्रकाशयुक्त तारे की तरह जान पड़ती है l
🌠 दूसरी तरह कि उल्का, उल्का प्रस्तर (Meteorites) कहलाती है l यह इतनी बड़ी होती है कि इसका कुछ अंश पृथ्वी तक पहुंच जाता है l
🌠 तीसरी तरह कि उल्का अग्निपिण्ड (Fireballs) कहलाती है l ये बड़ी होने पर भी आकाश में ही चूर-चूर हो जाती हैं l
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